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डेविस कप: सोमदेव-युकी को मौका, भूपति और बोपन्ना बाहर

| Feb 23, 2013 at 08:34pm | Updated Feb 23, 2013 at 09:10pm

नई दिल्ली। सोमदेव देववर्मन, युकी भाम्बरी और सनम सिंह ने इंडोनेशिया के खिलाफ आगामी पांच से सात अप्रैल तक बेंगलुरू में खेले जाने वाले डेविस कप के पहले दौर के प्लेऑफ मुकाबलों के लिए भारतीय टीम में वापसी की है। उनको दक्षिण कोरिया के खिलाफ हुए मुकाबले से में नहीं चुना गया था।

अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के खिलाफ विद्रोह करने वाले खिलाड़ियों का नेतृत्व करने वाले सोमदेव और युकी को एकल मुकाबलों के लिए चुना गया है। जबकि सनम को युगल मुकाबलों के लिए अनुभवी खिलाड़ी लिएंडर पेस का जोड़ीदार चुना गया है।

इसके अलावा श्रीराम बालाजी और विजयकांत मलिक को अतिरिक्त खिलाड़ियों के रूप में टीम में जगह दी गई है।

चयनकर्ताओं ने बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जूनियर खिलाड़ी नए राष्ट्रीय चैंपियन राम कुमार रामानाथन और अर्जुन खाड़े को टीम में शामिल करने का निर्णय लिया है ताकि वे डेविस कप खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण ले सकें।

युगल जोड़ियों के सम्बंध में कोच जीशान अली और गैर-खिलाड़ी कप्तान शिव प्रकाश मिश्रा फैसला करेंगे। प्रकाश मिश्रा के लिए यह विदाई मुकाबला होगा।

उच्च वरीय होने के बावजूद युगल मुकाबलों के विशेषज्ञ महेश भूपति और रोहन बोपन्ना टीम में जगह बनाने में असफल रहे हैं। ये दोनों खिलाड़ी लंदन ओलम्पिक में एक साथ खेलना चाहते थे लेकिन अवसर न दिए जाने के कारण चयन समिति के निर्णय का विरोध किया था। जिसके बाद इन्हें 2014 तक टीम से बाहर कर दिया गया, लेकिन न्यायालय ने इस निर्णय पर रोक लगा दी थी।

अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के चयनकर्ताओं का कहना है कि उन्हें टीम में तीन एकल विशेषज्ञों और एक युगल विशेषज्ञ की जरूरत है, इसलिए भूपति और बोपन्ना के लिए कोई जगह नहीं बचती।

चयनकर्ताओं ने कहा कि युगल जोड़ियों के सम्बंध में कोच जीशान अली और गैर-खिलाड़ी कप्तान शिव प्रकाश मिश्रा मैच से पहले फैसला करेंगे।

मिश्रा ने शनिवार को चयन समिति की बैठक में शिरकत की थी और उनसे एआईटीए के महासचिव भारत ओझा ने एक और मुकाबला खेलने की गुजारिश की थी। इससे पहले दक्षिण कोरिया के खिलाफ खेला गया मुकाबला उनका अंतिम मैच था।

बेंगलुरू मुकाबले के बाद अगले साल तक भारत के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं है। एआईटीए को उससे पहले जितने भी पिछले मुद्दे हैं उनके निपटारे की उम्मीद है। इसमें एकमत होकर टीम का कप्तान चुनने का मुद्दा भी शामिल है।

ओझा को आशा है कि खासकर सोमदेव को मिश्रा की कप्तानी तहत खेलने में कोई आपत्ति नहीं होगी। खिलाड़ियों की दूसरी मांगों के अलावा मिश्रा को निकालने की मांग भी थी।

ओझा ने कहा कि हम कोई उम्मीद नहीं रखते हैं। हमें केवल आशा है कि खिलाड़ी आगे आकर एक साथ खेलेंगे। मिश्रा दक्षिण कोरिया के मैच के बाद ही इस्तीफा देना चाहते थे। परंतु हमने मिश्रा से इंडोनेशिया के खिलाफ मैच खेलने की गुजारिश की। साथ ही उन्होंने कहा कि कोच और टीम का कप्तान चुनना कार्यकारी का विशेषाधिकार है।

वहीं, 38 वर्षीय भूपति ने कहा था कि यह उनका अंतिम साल है, जबकि बोपन्ना को अभी कुछ सालों खेलना है।

मुख्या चयनकर्ता अनिल धूपर ने कहा कि चयनकर्ताओं के लिए टीम चुनना मुश्किल नहीं था। सोमदेव पिछले दो महीनों से अच्छी लय में चल रहे हैं और लिएंडर पेस एक बार फिर से टीम का नेतृत्व करेंगे।

धूपर ने कहा कि दक्षिण कोरिया के खिलाफ मुकाबले में पेस के जोड़ीदार पूर्व शर्मा को चुनने पर भी गौर किया गया था। लेकिन चयनकर्ताओं की पहली पसंद विष्णु वर्धन थे।

विष्णु को घुटनों की चोट के कारण शामिल नहीं किया जा सका। विष्णु लंदन ओलंपिक में लिएंडर पेस के जोड़ीदार थे।

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