श्रीनगर। कश्मीर में आतंकियों का तांडव शुरू हो गया है। संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद तो हालात बदतर हो रहे हैं। सूबे में सरपंचों को आतंकियों की धमकी के आगे झुकना पड़ रहा है और पद से इस्तीफा देना पड़ रहा है। बीते दो साल में आतंकियों ने घाटी में अब तक पांच सरपंचों की हत्या कर दी है। सरपंचों का कहना है कि उनको सुरक्षा देने में सरकार विफल है। लोकतांत्रिक तरीके से जनता से चुनकर आए सरपंचों को आतंकियों के आगे झुकना पड़ रहा है और अपने पद से इस्तीफा देना पड़ रहा है। वहीं घाटी में इस दहशत पर बीजेपी ने कहा है कि वो इस मसले को संसद में उठाएगी।
जम्मू-कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस के प्रेसिडेंट शफीक मीर ने बताया कि घाटी में पिछले दो साल के अंदर पांच सरपंचों की हत्या कर दी गई। आतंकवादियों ने उन्हें खुलेआम मारने की धमकी दी थी। सरकार ने उनकी सिक्योरिटी के लिए कुछ भी नहीं किया। अफजल गुरु को फांसी देने के बाद तो हालात और बिगड़ गए हैं। इसके लिए सीधे-सीधे सरकार ज़िम्मेदार है।
कुपवाड़ा के सरपंच गुलाम मोहम्मद मीर के मुताबिक ये बहुत अफ़सोसनाक बात है। सरकार टस से मस नहीं हो रही है। लोगों के पास इस्तीफा देने के अलावा कोई चारा नहीं दिख रहा है। पंचों को सॉफ्ट टारगेट के रूप में मारा जा रहा है। सभी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

वहीं पीडीपी नेता नईम अख्तर का कहना है कि इन वाकये से सभी बहुत मायूस हैं। अफज़ल गुरु को फांसी देने से पहले से ही हालात बहुत बिगड़े हुए हैं। सरकार ने फोर्स और सुरक्षाबल से लोगों पर काबू तो पा लिया, लेकिन उससे भी लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ है। कमजोर तबकों को निशाना बनाया जा रहा है। यह बहुत बुरा ट्रेंड है।
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