नई दिल्ली। हैदराबाद धमाके की जांच के बीच आज वित्त मंत्रालय की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल आतंक की फंडिंग में 300 फीसदी की बढोतरी हुई है। यही नहीं देश में हवाला कारोबार से लेकर नकली नोट पकड़े जाने के मामले भी कई गुना बढ़ा है।
हैदराबाद धमाके के बाद एक बार फिर ये सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर आतंकियों को सारे संसाधन जुटाने के लिए पैसे कौन मुहैया कराता है। इस बात का जवाब वित्त मंत्रालय की अपनी ही रिपोर्ट दे रही है। मंत्रालय के तहत काम करने वाली फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट यानी एफआईयू की रिपोर्ट के मुताबिक
- आतंक से जुड़ी फंडिंग में 300 फीसदी की बढोतरी हुई है।

- जबकि साल 2010-11 में ये आंकड़ा सिर्फ 428 ही था।
फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट का ये आंकड़ा इसलिए भी अहम है कि उसे जानकारी देने का जिम्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो, रॉ, इनकम टैक्स और कस्टम जैसे बेहद अहम विभागों पर है। इनकी जानकारी के आधार पर ही एफआईयू अपनी रिपोर्ट तैयार करती है।
हाल के दिनों में एफआईयू ने अपने डाटाबेस के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद जांच एजेंसियों को टेरर फडिंग की जानकारी दी है। उसकी रिपोर्ट में हवाला और टैक्स चोरी के आंकड़ों का भी ब्योरा है। रिपोर्ट के मुताबिक
- हवाला और टैक्स चोरी के मामले में भी 100 फीसदी की बढोतरी हुई है।
- साल 2011-12 में ऐसे 69 हजार मामले सामने आए।
- जबकि साल 2010-11 में ये आंकड़ा 20 हजार का था।
हवाला के जरिए पैसे का लेन-देन हो या फिर सीधे आतंकी हमलों के लिए फंडिंग एफआईयू की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। एजेंसी की मानें तो आतंक की फंडिंग के नए रूटों का खुलासा होने के चलते भी आंकड़ों में इजाफा हुआ है।
आतंकी फंडिंग के अलावा नकली नोट के मामले में काफी बढ़े हैं। मालूम हो कि देश के किसी भी बैंक में नकली नोट पाए जाने पर बैंक को उसकी रिपोर्ट एफआईयू को करनी होती है। इस साल एफआईयू की रिपोर्ट के मुताबिक
- देश में नकली नोट पकड़े जाने के मामले भी 30 फीसदी बढ़े हैं।
- साल 2011-12 में नकली नोट के 3,27,382 मामले सामने आए।
- जबकि साल 2010-11 में ये आंकड़ा 2,51,448 था।
नकली नोट के रूट और आतंक का रिश्ता जांच एजेंसियों के लिए नया नहीं है। लेकिन आतंक की फंडिंग से लेकर नकली नोट के बढ़ते मामले देश की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।
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