लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (एसपी) की सरकार बनने के बाद से ही कई महात्वाकांक्षी परियोजनाएं शुरू की गईं, जिन्हें पूरा करने के लिए अधिकारी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। लेकिन इससे 12 मार्च से शुरू होने जा रही यूपी बोर्ड की परीक्षाओं की तैयारी बाधित हो सकती है। प्रदेश सरकार की ओर से छात्रों को लाभान्वित करने के लिए करीब आधा दर्जन योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इनमें लैपटॉप और टैबलेट का वितरण, पढ़ें बेटियां-बढ़ें बेटियां, हमारी बेटी उसका कल और कन्या विद्या धन के अलावा कई योजनाएं शामिल हैं।
प्रदेश शिक्षा विभाग के एक आला अधिकारी ने बताया कि 15 मार्च को सरकार का एक साल पूरा हो रहा हैं। सरकार की मंशा है कि इन योजनाओं को एक साल पूरा होने से पहले किसी तरह से मूर्त रूप दे दिया जाए। इन्हीं योजनाओं को पूरा करने के लिए अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारी की मानें तो बोर्ड की तैयारियां प्रभावित जरूर हो रही हैं, क्योंकि इन योजनाओं में लाभान्वित होने वाले बच्चों की संख्या करीब दो लाख है।

पात्र छात्रों के चयन के लिए एक-एक आवेदन को अच्छी तरह से जांचा-परखा जा रहा है। इसकी सारी जिम्मेदारी जिला विद्यालय निरीक्षकों को ही सौंपी गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इन योजनाओं में व्यस्तता की वजह से ही बोर्ड परीक्षा की तैयारियां रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं। बोर्ड की परीक्षा शुरू होने में कुछ दिन ही शेष हैं, लेकिन आलम यह है कि अभी तक कक्ष निरीक्षकों की तैनाती की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इसके अलावा बहुत सी प्रकियाएं सुस्त पड़ी हुई हैं।
सरकार की इस लापरवाही को लेकर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि सरकार अपनी चुनावी योजनाओं को पूरा करने के लिए चाहे जो करे, लेकिन इन योजनाओं की वजह से बोर्ड परीक्षा की तैयारियां बाधित नहीं होनी चाहिए। पाठक ने कहा कि सरकार की योजनाओं की वजह से पहले ही शिक्षा बाधित हुई है और अब परीक्षा की तैयारियां भी बाधित हो रही हैं। हम मुख्यमंत्री से यह सुनिश्चित करने की मांग करते हैं कि योजनाओं की वजह से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
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