सैन फ्रांसिस्को। ईरान के परमाणु केंद्रों को ध्वस्त करने के लिए तैयार किए गए स्टक्सनेट वायरस मामले में हुए एक नए खुलासे से पता चला है कि साल 2005 में जब वहां का परमाणु कार्यक्रम बेहद शुरुआती चरण में था तभी से इस वायरस हमले की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी।
साइबर सुरक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सिमेटेक कार्पोरेशन के शोधर्कताओं ने इस वायरस पर मंगलवार को जारी की गई 18 पन्नों की रिपोर्ट में बताया कि इस हमले को अंजाम देने के लिए शुरुआती वायरस साल 2005 में तैयार किया गया था। इस वायरस को स्टक्सनेट 0.5 का नाम दिया गया है। इजरायल और अमेरिका को इस वायरस को तैयार करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।
कंपनी के शोधर्कता लियाम ओ मुरखु ने कहा कि यह तथ्य वाकई में आश्चर्यचकित कर देता है कि इस वायरस पर साल 2005 से ही काम चल रहा था। ईरान उस समय अपने परमाणु कार्यक्रम के बेहद शुरुआती चरण में था। उन्होंने बताया कि इसे ईरान के खिलाफ साल 2007 में साइबर युद्ध में उतार दिया गया था। शोधर्कताओ ने वायरस ग्रस्त कंप्यूटरो में से निकाले गए हजारो वायरसों के बीच में से स्टक्सनेट 0.5 को ढूंढ कर निकाला है।

इस वायरस का साल 2010 में पता लगने के साथ ही शोधर्कताओं ने इससे मिलते जुलते कई और खतरनाक वायरसो को भी ढूंढ़ निकाला जिनमे फलेम डुगु और गौस शामिल है। स्टक्सनेट 0.5 को फलेम के कोड पर ही तैयार किया गया है।
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