नई दिल्ली। दिल्ली में ऐसे भी कुछ लोग हैं जो दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं। ऐसा ही एक ग्रुप है ‘जमघट’। ये ऐसे लोगों का जमघट है जो एक ख़ास मकसद के लिए लोगों के बीच नुक्कड़ नाटक करते हैं।
सड़कों पर हजारों-लाखों लोग रहते हैं। कोई उनकी देखभाल नहीं करता है और ना ही कोई उनके बारे में सोचता है। जमघट के सदस्य बेघर लोगों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताते है, उनकी स्थिति का अनुमान लगाते हैं उनसे बातचीत के दौरान उनके हालात का पता करते हैं और ये जानने की कोशिश करते हैं कि इन लोगों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और फिर हम कोशिश करते हैं कि उनकी हालत में सुधार आएं।
जमघट 10-15 लोगों का एक थिएटर ग्रुप है जो नुक्कड़ नाटकों और नाइट वाकिंग के ज़रिए जागरूकता फैलाने का काम करता है। हर महीने ये ग्रुप एक नाटक का मंचन लोगों के बीच करता है और सड़कों पर रहने वाले लोगों की अंधेरी ज़िंदगी में रोशनी लाने की कोशिश करता है।
इस नेक काम के लिए जमघट के मार्फत लोगों को जो़ड़ने का काम किया है एक ऐसे शख्स ने जिसने अपनी कला को ही अपने शौक का ज़रिया बनाया। इस शख्स का नाम है अमित सिन्हा।
आज आलम यह है कि जमघट के जरिए 20,000 रु महीना तक इक्ट्ठा हो जाता है। जमा हुए इन पैसों से बेघर बच्चों के लिए आज एक घर है।
यहां पर जो बच्चे है वो ज्यादातर बेघर हैं और अपनी ज़िंदगी की राह से भटके हुए हैं। इनकी कोशिश रहती है कि वे इन्हें सही दिशा की ओर ले जाएं जिसके लिए इनका भविष्य बेहतरीन तरीके से संवर जाएं। इनके मानसिक तनाव से बाहर निकाल सके। इनमें आत्मविश्वास बढाएं।
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