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सेक्स और बलात्कार सिखाते वीडियो गेम

Updated Feb 18, 2008 at 11:15 am IST |

 

18 फरवरी 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
अनुपमा त्रिपाठी

लखनऊ।
क्या आप अपने बच्चों के खेल पर नजर रखते हैं, क्या आप यह जानने की कोशिश करते हैं कि आपका बच्चा वीडियो पार्लर में जाकर कौन से गेम में रुचि ले रहा है? अगर नहीं तो अब होशियार हो जाइए, क्योंकि बाजार में ऐसे गेम आ गए हैं जो बच्चों को सेक्स और बलात्कार के तरीके सिखा रहे हैं।

इन अश्लील गेम के माध्यम से आम बच्चों के भविष्य को चुनौती दी जा रही है। खो-खो, लुका-छिपी, लूडो व कैरम बच्चों के लिए जैसे गुजरे जमाने की बात हो गई है। कम्प्यूटर युग के बच्चे इनके साथ खेलना पसंद नहीं करते।

पढ़ें: वीडियो गेम पर चलेगी सेंसर की कैंची?

बचपन में ही बड़ों की सोच की दहलीज छू रहे इन बच्चों पर अश्लील गेम आग में घी की भूमिका निभा रहे हैं। इन गेम की चपेट में उत्तर प्रदेश की राजधानी समेत तमाम जिले तो शामिल हैं ही, लेकिन वितरक बताते हैं कि इनकी कारोबारी का गढ़ तो दिल्ली और मुम्बई जैसे महानगर ही हैं।

हैरानी की बात यह भी है कि अमेरिका में यह गेम प्रतिबंधित हैं लेकिन यहां यह खुलेआम बिक रहे हैं। जापानी कम्पनी द्वारा बनाए गए इन गेम में हाउ टू रेप, सेक्सी बीच-3, स्कूलमेट व आर्टीफिशियल गर्ल्स-3 मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा सबसे ज्यादा डिमांड में डू क्राइम, आउट ला गोल्फ, रम्बल रोजेज, डैम जैमे सीरिज, प्ले ब्वॉय का द मेशन गॉड ऑफ वॉर, मेटल गियर सीरिज, द फॉल, बार्बी डॉल, कंडोम और जीटीए हैं।

इनमें जीटीए ग्रांड एंड ऑटो थेप्ट की बिक्री इतनी ज्यादा है कि डीवीडी ऑर्डर के बाद ही मिलती है। इन गेम की खास बात यह भी है ये ‘उत्तेजक गेम’ हैं। इसमें खिलाड़ी को अपनी दिमागी क्षमता के आधार पर खेलना पड़ता है इनके ग्राफिक्स असल से दिखते हंक और इसमें सेक्स से संबंधित सारे डेमो कम्प्यूटर पर दिखाए जाते हैं।

पढ़ें: गेम खेलने में वयस्क सबसे आगे

कई जगहों के साइबर कैफे इन अश्लील गेम सीडी और डीवीडी के बड़े-बड़े अड्डे हैं। नाम न लिखने की शर्त पर एक गेम आपूर्तिकर्ता ने आईएएनएस को बताया कि इन गेम को बड़ी तादाद में बच्चे खरीद रहे हैं। ऐसे गेम्स के प्रति उनकी दीवानगी बढ़ती जा रही है। 15 से 350 रुपए के बीच में आसानी से इनका पायरेटेड संस्करण मिल रहा है।

बच्चे इस ओर कितना आकर्षित हो रहे हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लखनऊ में ही प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा के अश्लील गेम बिक रहे हैं। नाजा बाजार का एक सप्लायर तो यह भी बताता है कि इसमें महिलाएं भी खास रुचि ले रही हैं।

वह बताता है यह गेम जापानी कम्पनी इल्यूजन ने उतारे हैं। बाजार में इनकी पायरेटेड सीडी उपलब्ध हैं। बहरहाल यहां इन गेम से आम बच्चों को मानसिक विकृति का शिकार बनाया जा रहा है। लेकिन राजनीतिक षडयंत्रों के खेल में शासन व प्रशासन का ध्यान इस खेल की ओर नहीं जा रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के तहत छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मनोचिकित्सक पद पर कार्यरत डॉ. मधु पाठक कहती हैं कि हां, काफी बच्चों, विशेषकर 13 व 14 वर्ष की आयु वाले इस ओर काफी आकर्षित हो रहे हैं। कई माता-पिता ऐसे बच्चों की शिकायत लेकर आए हैं। वह कहती हैं कई काउन्सिलिंग में पता चला वीडियो गेम की आदत उन्होंने डाली और अब वह व्यसन में बदल गई। उच्च न्यायालय अधिवक्ता राम उग्रह शुक्ला कहते हैं कि आईटी कानून-2000 के तहत यह अपराध है। खरीदने व बेचने वाले दोनों गुनहगार हैं।

 

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पाठकों की राय | 18 Feb 2008

Mar 25, 2013

गेम खेलना स्वअस्थ व दिमाग के लिए अचछा है1

padam ghevra

Mar 02, 2009

it is a very good step from the print media, and it shoud be telecast on T.V.  by which parents will aware than they will take precautions and action to prevant to it.

sanjay sharma delhi

Jul 01, 2008

अब अभिवावीको को अपने बच्चो के प्रति स्चेत हो जाना चाहिए.

amit melbourne

Feb 18, 2008

इश् समाचार को टीवी पर शो करो

raju mumbai


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