यह विशेष पेशकश पूरी तरह से रीडर्स की और रीडर्स के लिए हैं जिसमें होंगी रीडर्स की प्रतिक्रियाएं, लेख और ब्लॉग भी। तो भेजिए अपने लेख और ब्लॉग और जी भर कर कीजिए आईबीएनखबर.कॉम की खबरों पर अपने कमेंट्स।
उठ जवान हिंद के, पुकारता है ये जहां।।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
पुकारती है कश्मीर की घाटियां तो आओ रे।
बिछड़ रहा वो स्वर्ग, उठ जरा उसे बचाओ रे।।
शांत है कटार, क्यों जुबां तुम्हारी मौन है।
होते टुकड़े मां के, तुमको रोकता वो कौन है।।
सरजमीं पुकारती उठो हो सोए तुम कहां।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।