ये एक बहुत ही दर्दनाक कहानी है। इस कहानी में एक अंधी मां है। एक ऐसी मां जिसे जिंदगी ने हर कदम पर छला है।
एक मां की दर्दनाक कहानी 
ये एक बहुत ही दर्दनाक कहानी है। इस कहानी में एक अंधी मां है। एक ऐसी मां जिसे जिंदगी ने हर कदम पर छला है। जिंदगी ने हर कदम पर छला है लेकिन भगवान से विश्वास नहीं उठता है। इस मां के साथ क्या क्या होता है जानकर आपकी आंखें छलक जाएंगी।

मां के लिए बेटे की कुर्बानी 
कैलाश गिरी को भी नहीं पता कि वो कौन सा हौसला है जो उन्हें इस तरह मां की भक्ति में लगाए हुए है।

मां की सेवा में लीन बेटा 
डायरी कहती है कि उज्जैन के आखिरी पड़ाव तक पहुंचने में इस बेटे को छह साल और लगेंगे।



























