ताजमहल जिसे शाहजहां ने मुहब्बत की निशानी के बतौर दुनिया को दिया। जिसे टैगोर ने वक्त के गाल पर ठहरा हुआ आंसू कहा। जिसकी खूबसूरती इस कदर तिलिस्मी है कि हर कोई ठगा सा रह जाता है। यूं तो ये एक मकबरा है, लेकिन यहां पहुंचकर ख्यालों में मौत नहीं जिंदगी नाचने लगती है।
ताजमहल नहीं, ममी महल है आगरा में
ताजमहल जिसे शाहजहां ने मुहब्बत की निशानी के बतौर दुनिया को दिया। जिसे टैगोर ने वक्त के गाल पर ठहरा हुआ आंसू कहा। जिसकी खूबसूरती इस कदर तिलिस्मी है कि हर कोई ठगा सा रह जाता है। यूं तो ये एक मकबरा है, लेकिन यहां पहुंचकर ख्यालों में मौत नहीं जिंदगी नाचने लगती है। वही मुमताज जो खूबसूरती की मिसाल थी। सदियों से लोग उसकी खूबसूरती के बारे में अंदाज लगा रहे हैं, इस ख्याल के साथ कि काश हम उसे देख पाते।

मुमताज पीछे छोड़ गईं एक गमगीन शहंशाह
17 जून 1631 दर्द से तड़पती मुमताज ने अपनी 14वीं संतान को जन्म दिया।

जैनाबाद बाग में मुमताज ने ली आखिरी सांस 
मुमताज की लाश को एक कश्ती में रखा गया जिसमें खास तेल मौजूद था।

वीरान है वो दिल जिसमें मुमताज नहीं 
नौरोज के मौके पर पहली बार अर्जुमंद को शहजादे खुर्रम ने देखा और अपना दिल दे बैठे।

























