
‘क्या आप जानते हैं’ सेक्शन में आप अपने क्षेत्र के नेता के बारे में पूरी जानकरी हासिल कर सकेंगे। इसके तहत हम हर क्षेत्र और इलाके के नेता का पूरा प्रोफाइल उपलब्ध कराएंगे जिनसे आप ये जान सकेंगे कि आपका नेता कैसा है। इसके आधार पर आप अपने लिए उचित नेता का चुनाव भी कर सकते हैं।
सबसे चौंकाने वाले रहे पिछले चुनाव के नतीजे 
चौदहवें लोकसभा चुनाव-2004 के नतीजे एनडीए के लिए जबर्दस्त झटका थे। यूपीए के लिए सुखद आश्चर्य और मीडिया के लिए सबक। किसी ने नहीं सोचा था कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए को जनता बड़ी बेरहमी से सत्ता के बाहर का रास्ता दिखा देगी। बीजेपी को पूरा यकीन था कि जनता उसे दोबारा केंद्र की सत्ता के सिंहासन पर बिठाएगी लेकिन 2004 लोकसभा के नतीजों ने बीजेपी की सारी आकांक्षाओं पर पानी फेर दिया।

14वां लोकसभा चुनाव अब तक का सबसे महंगा 
चौदहवें लोकसभा चुनाव में एनडीए ने बाकायदा हाई टेक प्रचार किया।

पहली बार पूरे पांच साल चली गैर कांग्रेसी सरकार 
1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को गिराने के लिए पूरी भूमिका तैयार की गई थी।

99वें में छाया रहा सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा 
सोनिया के विदेशी मूल के मुद्दे को विरोधी पार्टियों ने चुनाव में खूब भुनाया।

कई मायने में ऐतिहासिक थे 13वें लोकसभा चुनाव 
कई पार्टियों की मिलीजुली सरकार केंद्र में पूरे पांच साल पूरा करने में कामयाब रही।

जयललिता की जिद ले डूबी अटल सरकार को 
बीजेपी ने कहा कि जयललिता भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए ऐसा कर रही हैं।

वाजपेयी के कारनामे से सन्न रह गई दुनिया 
वाजपेयी सरकार इस बार सिर्फ 13 महीने तक ही सत्ता में टिकी रह सकी

1998 में वाजपेयी के नेतृत्व में BJP सत्ता तक 
1998 में बीजेपी ने जमीनी हकीकत को देखते हुए कई दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया।

सोनिया का पहला चुनाव, एक सीट बढ़ी 
1998 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पूरा भरोसा था कि वो अच्छा प्रदर्शन करेगी।

सोनिया की नाराजगी ने ली गुजराल सरकार की बलि 
माना जाता है कि सोनिया गांधी ने डीएमके को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

कांग्रेस के हाथों की कठपुतली बनी रहीं दो सरकारें 
युनाइटेड फ्रंट की सरकार कांग्रेस के हाथों कठपुतली बनी रही।

1997 के चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों की पकड़ 
1997 में बड़ी पार्टियां और क्षेत्रीय पार्टियों साथ मिलकर सरकार बनाने की ओर अग्रसर हुईं।

कांग्रेस को ले डूबीं नरसिम्हा राव की नाकामियां 
नतीजा ये हुआ कि अगले 2 सालों में भारत ने तीन प्रधानमंत्री देखे।

बोरिया-बिस्तर समेट चुके राव बन गए पीएम 
राजनीति से रिटायरमेंट ले चुके नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई।


























