दूकानदार एक झंडा निकाल कर देता है।
संता: अरे इसमें और कलर दिखाओ।
संता: तो फिर ठीक है डॉक्टर साहब वरना अनपढ़ आदमी की जिंदगी कोई जिंदगी है।
श्रोता - पानी की बालटी में
उपदेशक - आखिर क्यों ?
श्रोता - वह गधा जो ठहरा !
एक बार संता लाइब्रेरी गया और एक उपन्यास लेकर कोने में बैठकर दिनभर पढ़ता रहा।
बंता की पत्नी का झक्कास जवाब।
टीचर संता ने कहा- तुम लोगों को शर्म आना चाहिए।
बेटा (मां से)- ‘मेरे नीचे 25 आदमी काम करते है।‘