BOOKS REVIEW

  • 08:20 PM, Feb 27, 2015

    'दिन' की तपिश, जो 'सांझ' कर दे!

    कैसे चंद लफ्ज़ों में सारा प्यार लिखूं। एक कशिश जो दिल में हो, उसे शब्दों में ढाल दिया जाए तो क्या बात हो? कुछ ऐसी ही कशिशों ने कोशिशें की है, दिनेश गुप्ता को 'दिन' बनाने में।
  • 02:45 PM, Feb 27, 2015

    'दिन' की तपिश, जो 'सांझ' कर दे!

    'दिन' की तपिश, जो 'सांझ' कर दे!
  • वक्त के साथ 12:16 PM, Sep 08, 2008

    वक्त के साथ 'बूढ़े' हो चले हैं नॉयपॉल के विचार

    i>अ राइटर्स पीपल, वेज ऑफ लुकिंग एंड फीलिंग एक ऐसे बुजुर्ग लेखक की किताब है जो आत्मकेंद्रित हो गया है..